28% की भारी गिरावट क्यूं आई IEX की शेयरों में।

28% की भारी गिरावट क्यूं आई IEX की शेयरों में।

24 जुलाई को शेयर मार्केट खुलते ही IEX(INDIAN ENERGY EXCHANGE) की शेयर में भारी गिरावट देखी गए। IEX की शेयरों m 28% की गिरावट देखी गए।

क्या है IEX?

IEX (Indian Energy Exchange) भारत का एक प्रमुख बिजली ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म है, जहाँ बिजली उत्पादक (जैसे बिजली कंपनियाँ) और बिजली उपभोक्ता (जैसे राज्य सरकारें, उद्योग आदि) बिजली की खरीद और बिक्री करते हैं।

IEX के मुख्य फंक्शन:

1. Day Ahead Market (DAM) – अगले दिन के लिए बिजली की खरीद-बिक्री।

2. Real Time Market (RTM) – तत्काल जरूरत के लिए बिजली।

3. Green Market – सौर और पवन जैसे हरित ऊर्जा स्रोतों की ट्रेडिंग।

4. Term Ahead Market – कुछ दिन या सप्ताह के लिए अग्रिम बिजली की खरीद।

5. Renewable Energy Certificates (RECs) – हरित ऊर्जा का प्रमाणीकरण और व्यापार।

कारण:

24 जुलाई, गुरुवार को इंडियन एनर्जी एक्सचेंज लिमिटेड (IEX) के शेयरों में 28% की भारी गिरावट आई और यह अपने निचले सर्किट पर पहुंच गया। यह गिरावट तब देखी गई जब खबरें सामने आईं कि केंद्रीय विद्युत नियामक आयोग (CERC) ने डे-अहेड मार्केट (DAM) में पावर कपलिंग लागू करने को मंजूरी दे दी है।

नई प्रणाली के पहले चरण के तहत, जनवरी 2026 तक DAM को कपल किया जाएगा। इस प्रणाली में देश की सभी पावर एक्सचेंज बारी-बारी से मार्केट कपलिंग ऑपरेटर (MCO) के रूप में काम करेंगी, जिसे राउंड-रॉबिन व्यवस्था कहा जाता है।

मार्केट कपलिंग एक ऐसी व्यवस्था है, जिसमें भारत की सभी पावर एक्सचेंज से खरीदी और बिक्री की बोली को एक साथ जोड़ा और मिलाया जाएगा, जिससे एक सामान्य बाजार समाशोधन मूल्य (Market Clearing Price – MCP) तय किया जाएगा। इसका मतलब होगा कि हर समय बिजली का एक ही मूल्य होगा, चाहे वह किसी भी एक्सचेंज के माध्यम से खरीदी या बेची जा रही हो।

यदि इसे लागू किया जाता है, तो सभी पावर एक्सचेंज केवल एक प्लेटफॉर्म के रूप में कार्य करेंगे जहाँ खरीद और बिक्री की बोलियां ली जाएंगी और खरीदार को बिजली वितरित की जाएगी। यह तंत्र तत्काल उपभोक्ताओं पर कोई प्रभाव नहीं डालेगा, लेकिन दीर्घकालिक रूप से बिजली दरों में कमी आ सकती है।

समान मूल्य खोज के अलावा, केंद्र सरकार यह व्यवस्था इसलिए लागू करना चाहती है क्योंकि वह बिजली व्यापार में पावर एक्सचेंज की हिस्सेदारी बढ़ाना चाहती है। सरकार का इरादा 25 वर्षों तक चलने वाले दीर्घकालिक बिजली खरीद समझौतों (PPA) पर निर्भरता कम करने का है।

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